कोरोना वायरस - एक वैश्विक महामारी पर निबंध
कोरोना वायरस कई प्रकार के विषाणुओं का एक समूह है जो स्तनधारियों और पक्षियों में रोग उत्पन्न करता है। इनका जिनोम राइबोज न्यूक्लिक अम्ल से बने होने के कारण निरंतर परिवर्तनशील होते हैं। ये नाभिकीय अम्ल और प्रोटीन से बने होते हैं जो शरीर के बाहर मृत समान, परंतु शरीर के अंदर जीवित होकर संक्रमण पैदा करते हैं।
कोरोना वायरस की उत्पत्ति सबसे पहले 1930 में एक मुर्गी में हुई थी और 1940 तक कई जानवरों में पाया गया। फिर सन् 1960 में एक व्यक्ति में पाया गया । इसके बाद वर्ष 2019 में इसका भयावह रूप चीन के वुहान प्रांत देखा गया जो धीरे-धीरे पूरे विश्व में फैला। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना का नाम कोविड-19 (COVID-19) रखा। जहाँ को (CO) अर्थ है कोरोना, वि (VI) का अर्थ है वायरस, डी (D) का अर्थ है डिजीज और 19 का अर्थ है वर्ष 2019। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस को फरवरी 2020 में वैश्विक महामारी घोषित किया।
धीरे-धीरे इस महामारी से वैश्विक संकट गहराता चला गया। इस महामारी के कारण एक दूसरे से जुड़ी हुई प्रणालियां पूरी तरह से बदल गई। इस वायरस के प्रकोप को काबू करने के लिए अलग-अलग देशों की सरकारों ने सामाजिक मेल-जोल पर पाबंदी लगा दी जिसके कारण लोगों को अपने घरों में ही कैद रहना पड़ा। भारत सरकार ने भी इस महामारी पर काबू पाने के लिए पहली बार 24 मार्च 2020 को 21 दिनों के संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की थी। जिससे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई।
कोरोना काल में लॉकडाउन से हमारे समाज, पर्यावरण और हमारी जीवन शैली पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। जैसे पर्यावरण का स्वस्थ होना, शिक्षा का डिजिटल होना, परिवार में आपसी प्रेम बढ़ना, अनुशासित जीवन शैली आदि।
कोरोना महामारी के दौरान देश में आर्थिक मंदी का दौर आया। उत्पादन और खपत दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होने से रोजगार को नुकसान हुआ और बेरोजगारी बढ़ी। पर्यटन उद्योग का पतन हुआ। बैंकों के एनपीए में भी वृद्धि हुई।
इससे पहले भी कई महामारी आई और भविष्य में आ सकती हैं। इनसे निपटने के लिए स्वास्थ्य प्रणाली को और मजबूत करना होगा एवं हमें स्वस्थ जीवन शैली को अपनाना होगा। तभी हम भविष्य में इस तरह की चुनौतियों का सामना कर पाएंगे।




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